10+ प्रसिद्ध हस्तिनापुर में घूमने की जगह और दर्शनीय स्थल

इस लेख में हस्तिनापुर की यात्रा से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। जैसे हस्तिनापुर से जुड़े रोचक तथ्य, हस्तिनापुर में घूमने की जगह (Hastinapur me Ghumne ki Jagah), हस्तिनापुर कैसे जाएं, हस्तिनापुर जाने के लिए सही समय, हस्तिनापुर में कहां रुके और हस्तिनापुर के स्थानीय भोजन के बारे में विस्तार से जानेंगे।

हस्तिनापुर का नाम आते ही महाभारत काल में लोग पहुंच जाते हैं। क्योंकि महाभारत की कहानी भारत के हर एक बच्चे बच्चे को पता है और हस्तिनापुर का नाम महाभारत के गौरव इतिहास से हमेशा से ही जुड़ा हुआ है।

यह शहर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है, जो न केवल इतिहास की दृष्टि से बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह जैन धर्म के 3 तीर्थकरों का जन्म स्थल भी है। यहां पर जैन समुदाय से संबंधित कई सारे मंदिर हैं।

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इसके अतिरिक्त महाभारत के कथाओं को जीवंत करते हुए कई दर्शनीय स्थल मौजूद है। अगर आप महाभारत के गौरवशाली इतिहास से दोबारा जुड़ना चाहते हैं तो आप हस्तिनापुर जा सकते हैं।

हस्तिनापुर के बारे में रोचक तथ्य

  • हस्तिनापुर पांडवों एवं कौरवों की राजधानी हुआ करती थी। हस्तिनापुर के शासन का सिहासन पाने के लिए ही महाभारत जैसे विश्व का सबसे महान युद्ध हुआ था। इसके बाद इस युद्ध में पांडव विजय होने के बाद हस्तिनापुर पर उन्होंने तकरीबन 35 से अधिक वर्षों तक शासन किया था।
  • हस्तिनापुर में कई सारे हिंदू धर्म से जुड़े प्राचीन मंदिर है लेकिन यह जैन धर्म के समुदायों के लिए भी एक पवित्र स्थान है। क्योंकि यहां पर जैन धर्म के 3 तीर्थकरों ने जन्म लिया था।
  • हस्तिनापुर ना केवल हिंदू और जैन धर्म के समुदाय के लिए बल्कि सिख धर्म के समुदायों के लिए भी महत्व रखता है। क्योंकि हस्तिनापुर से ढाई किलो मीटर की दूरी पर स्थित एक शेफपुर गांव में गुरु गोविंद सिंह जी के बहुत प्यारे माने जाने वाले भाई धर्म सिंह का जन्म स्थल है। जहां पर एक गुरु द्वारा बनाया गया है और यहां पर हर गुरुवार को लंगर का आयोजन किया जाता है।
  • हस्तिनापुर धर्म, प्राकृतिक सुंदरता, इतिहास और राजनीति का संगम है। कहा जाता है कि हस्तिनापुर लोकसभा सीट से जो पार्टी विजय होती है, आमतौर पर उसी पार्टी की सत्ता उत्तर प्रदेश में स्थापित होती है।
  • हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार कहा जाता है हस्तिनापुर में सबसे पहले महाराज भरत का शासन हुआ करता था। उसके बाद राजा धृतराष्ट्र ने यहां शासन किया और फिर पांडू के जेष्ठ पुत्र युधिष्ठिर ने शासन किया।
  • हस्तिनापुर में मौजूद महल के अंदर भगवान शिव का मंदिर आज भी मौजूद है और कहा जाता है इस मंदिर में पांडु की पत्नी द्रोपदी यज्ञ किया करती थी। मंदिर में पांचों पांडव की मूर्ति भी स्थापित है। बताया जाता है यह महाभारत काल की बनी हुई मूर्तियां हैं।

हस्तिनापुर का इतिहास

हस्तिनापुर की स्थापना को लेकर कहा जाता है कि सबसे पहले हस्तिनापुर में राजा भरत हुए थे‌। राजा भरत दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र थे, जिनके 9 पुत्र हुए। लेकिन उनमें से कोई भी योग्य नहीं था।

राजा भरत जब वृद्ध हो गए तो हस्तिनापुर के सिहासन के लिए वे चिंतित हो गए। क्योंकि परंपराओं के अनुसार सिहासन पर जेष्ठ पुत्र को बिठाना पड़ता है। लेकिन राजा के कोई भी पुत्र योग्य नहीं थे।

इस कारण वे अपने पुत्र को हस्तिनापुर का राजगद्दी नहीं देना चाहते थे। लेकिन उनके पास और कोई विकल्प नहीं था।

लेकिन जब उनके जेष्ठ पुत्र को राजगद्दी सोंपने का समय आया तब वे सोचने लगे कि उनके पुत्र दुष्यंत ने कितने गौरव के साथ उन्हें सिहासन सौंपा था और राजा भरत एक बहादुर राजा थे जिन्होंने हमेशा ही अपने राज्य और प्रजा के लोगों के भले के लिए सोचा।

लेकिन उनके पुत्र इस तरह नहीं है। शायद उनके पुत्र राज्य को सही से नहीं संभाल पाएंगे। इसीलिए उन्होंने निर्णय लिया कि वह किसी अन्य साधारण और बहादुर व्यक्ति को हस्तिनापुर की राजगद्दी सौंपेंगे।

तब राजा भरत ने एक बहादुर और साधारण नौजवान भूमन्यु को राज्य का उत्तराधिकारी घोषित किया। राजा भूमन्यछ हस्तिनापुर के सिंहासन पर बैठ गए और फिर आगे चलकर उनके पुत्र हुए जिनका नाम था सुबहोध्रा।

सुबहोध्रा के बाद उनके पुत्र हस्तीन हुए और हस्तिन ने ही इस शहर को हस्तिनापुर नाम दिया था। उन्होंने हस्तिनापुर को राजधानी बनाई थी। इससे पहले उनकी राजधानी खंडवाप्रस्त हुआ करती थी, जो जल प्रलय के कारण नष्ट हो गई थी। हस्तिन के वंशज अजामीढ़, दक्ष, संवरण, कुरु और शांतनु हुए।

यहीं से महाभारत के इतिहास की रूपरेखा तैयार हुई। क्योंकि शांतनु के 2 पुत्र धृतराष्ट्र और पांडव हुए और उन्हीं के पुत्र पांडवों और कौरवों के बीच महाभारत जैसा विश्व का सबसे बड़ा ऐतिहासिक युद्ध हुआ था।

हस्तिनापुर में घूमने की जगह (Hastinapur me Ghumne ki Jagah)

हस्तिनापुर अभयारण्य

प्रकृति प्रेमियों के लिए हस्तिनापुर में एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है हस्तिनापुर राष्ट्रीय उद्यान। यह राष्ट्रीय उद्यान विभिन्न जीव जंतु का प्राकृतिक आवास है। यह अभ्यारण तकरीबन 2073 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है।

Hastinapur Wildlife Sanctuary
हस्तिनापुर अभयारण्य

यहां तक कि यह मेरठ, बिजनौर, ज्योतिबा फुले नगर और गाजियाबाद में भी फैला हुआ है। महाभारत के युद्ध के मैदान का भी हिस्सा रह चुका है।

इस अभ्यारण में 72 फीट ऊंचा भगवान हनुमान को समर्पित एक मंदिर भी है। इस अभ्यारण में आप तेंदुआ, जंगली बिल्ली, लोमड़ी, बंदर बीज्जू जैसे विभिन्न प्रजाति के जानवर देख पाएंगे।

अष्टपद

अगर आप जैन समुदाय या जैन समुदाय के बारे में बहुत कुछ जानना चाहते हैं तो आप हस्तिनापुर में स्थित अष्टपद के दर्शन करने के लिए जा सकते हैं। यहां स्थित अष्टपद मूल अष्टपद का एक संरना है। मूल अष्टपद बद्रीनाथ से लगभग 160 मील आगे हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखला में बनाया गया है।

Ashtapad Hastinapur
अष्टपद

कहा जाता है कि इस स्थान पर जैन धर्म के प्रथम तीर्थ कर भगवान ऋषभदेव मोक्ष की प्राप्ति की थी। उसके बाद उन्हीं पहाड़ों पर उनके पुत्र महाराजा भरत चक्रवर्ती ने एक महल का निर्माण किया, जिसे उन्होंने हीरो से सजा दिया था।

जैन समुदायों का मानना है कि इस स्थान पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के कारण कुछ समुदायों ने मिलकर हस्तिनापुर में भी मूल अष्टपद की तरह ही एक संरना बनाया, जिसका व्यास 108 मीटर है। हस्तिनापुर में स्थित यह अष्टपद एक परम सुंदर संरचना है, जो पर्यटकों को आकर्षित करती है।

दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर

जैन धर्म में रुचि रखने वाले लोग या इनके संस्कृति को जानने में इच्छुक रखने वाले पर्यटक हस्तिनापुर की यात्रा के दौरान दिगंबर जैन बड़ा मंदिर का दर्शन करने जा सकते हैं। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर जैन धर्म के दिगंबर समुदायों से संबंधित है।

इस मंदिर का निर्माण 1801 ईसवी में किया गया था। यह मंदिर के चारों तरफ एक विशाल परिसर बना हुआ है, जिसके बीचो बीच पार्श्वनाथ की मूर्ति स्थापित की गई है, जो पर्यटकों को आकर्षित करती है।

Shri Digamber Jain Prachin Bada Mandir Hastinapur
दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर

इसके अतिरिक्त इस परिसर में कई सारी सुविधाएं हैं। जैसे कि वृद्धाश्रम है, शुद्ध जल पीने की व्यवस्था की गई है और यहां पर जैन धर्म से संबंधित एक बहुत बड़ा पुस्तकालय भी स्थित है, जहां पर आपको जैन समुदायों के बारे में विस्तृत रूप से जानने का अवसर मिलता है।

भाई धर्म सिंह गुरुकुल

सिख धर्म के श्रद्धालुओं के लिए हस्तिनापुर में एक पवित्र धार्मिक पूजा स्थल भाई धर्म सिंह गुरुकुल है। सिख धर्म को समर्पित यह गुरुद्वार हस्तिनापुर से 2.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

Bhai Dharam Sing Gurdwara Hastinapur
भाई धर्म सिंह गुरुकुल

यह शानदार संरचना वाला गुरुद्वार है, जिसका निर्माण भाई धर्म सिंह के द्वारा किया गया था। यहां पर हर दिन सीख श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।

इस ग्रुद्वारे के आसपास का वातावरण पर्यटकों को मोहित करती है, जहां पर आप आधा घंटा बैठ कर बहुत सुकून और शांत महसूस कर सकते हैं।

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प्राचीन पांडेश्वर मंदिर

ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में भगवान शिव को समर्पित बहुत ही प्राचीन मंदिर पांडेश्वर मंदिर स्थित है। कहा जाता है इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल में किया गया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। लेकिन इस मंदिर में भगवान शिव के अतिरिक्त पांचो पांडव की प्रतिमा भी स्थापित है।

Prachin Pandeshwar Mahadev Mandir Hastinapur
प्राचीन पांडेश्वर मंदिर

पांडेश्वर मंदिर को लेकर एक किवदंती इस प्रकार है कि महाभारत के युद्ध होने से पहले पांडवों के जेष्ठ भ्राता युधिष्ठिर ने इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी और महाभारत के युद्ध को जीतने का वरदान भगवान शिव से मांगा था। पांडेश्वर मंदिर के पास एक पहाड़ी पर हिंदू देवता का एक मंदिर है और यहां पर कई हिंदू आश्रम भी स्थित है।

इस स्थान को लेकर रोचक तथ्य यह है कि इसी स्थान पर पांडव और कौरव भाइयों ने ऋषि द्रोणाचार्य से वेद और पुराण की शिक्षा ग्रहण की थी।

कहा जाता है कि सबसे पहले ऋषि द्रोणाचार्य इसी स्थान पर पांडवों और कौरवों भाई से मिले थे। जब वे सभी लोग आपस में खेल रहे थे तब उनका एक गेंद यहां स्थित एक कुएं में गिर गया था। तब सभी राजकुमार परेशान हो गए थे।

उस समय गुरु द्रोणाचार्य ने कुछ घास के तिनकों की मदद से उस गेंद को कुएं से बाहर निकाला था, जिसे देख गंगापुत्र भीष्म प्रभावित हुए थे और उन्होंने सभी राजकुमारों को शिक्षा देने का दायित्व उन्हें दिया था।

जम्बूद्वीप जैन तीर्थ

हस्तिनापुर में स्थित जंबूद्वीप जैन समुदायों के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। विशाल परिसर में बनाई गई एक 115 फीट ऊंची खूबसूरत इमारत है, जिसकी वास्तुकला बहुत ही शानदार है।

यह खूबसूरत इमारत हस्तिनापुर आने वाले पर्यटकों को यहां आने के लिए आकर्षित करती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर में कोई भी मूर्ति स्थापित नहीं है, उसके बावजूद भी यहां पर एक दिव्य शक्ति के होने का एहसास होता है।

Jambudweep Jain Tirth Hastinapur
जम्बूद्वीप जैन तीर्थ

जंबूद्वीप के इमारत के चारों तरफ कई सारे मंदिर है और यहां पर कई बाग बगीचे भी मौजूद है, जिसकी हरियाली इस संरचना को और भी खूबसूरत बना देती है।

यहां पर पास में ही एक ध्यान मंदिर भी है, जहां पर श्रद्धालु कुछ समय बैठकर मेडिटेशन कर सकते हैं और अलौकिक शांति का अनुभव ले सकते हैं।

कमल मंदिर

जंबूद्वीप मंदिर के पास में ही एक खूबसूरत मंदिर स्थित है, जिसका नाम कमल मंदिर है। क्योंकि इसकी संरचना हुबहू कमल के फूल के समान है। इस मंदिर का निर्माण 1975 ईस्वी में किया गया था। इसकी वास्तुकला पर्यटकों के आंखो को खूब भाती है।

Lotus Temple Hastinapur
कमल मंदिर

यह मंदिर में जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी को समर्पित है। यहां पर जैन समुदाय से जुड़े श्रद्धालु देशभर से आते हैं और महावीर स्वामी की पूजा करते हैं। वे मंदिर को दान भी करते हैं।

यहां पर वे दीपक जलाते हुए महावीर स्वामी से अपनी मनोकामना मांगते हैं। यहां तक कि मनोकामना पूरी करने के लिए सोने की छतरी भी देते हैं।

शास्त्री नगर

अगर आप हस्तिनापुर की यात्रा के दौरान कुछ शॉपिंग करना चाहते हैं तो आप शास्त्री नगर जा सकते हैं। यह हस्तिनापुर में एक प्रख्यात शॉपिंग सेंटर है, जहां पर आपको दुनिया भर की हर खूबसूरत चीजें मिल जाएगी। हस्तिनापुर की यात्रा की याद के रूप में यहां से आप कुछ भी खरीदारी कर सकते हैं।

कैलाश पर्वत रचना

कैलाश पर्वत रचना हस्तिनापुर में स्थित जैन समुदायों से संबंधित एक खूबसूरत इमारत है, जो 150 फीट ऊंचा है। इस संरचना के चारों तरफ एक बहुत बड़ा सा परिसर है।

Kailash Parvat Rachna Hastinapur
कैलाश पर्वत रचना

इस परिसर में अन्य कई जैन मंदिर, यात्री निवासी और भोजनशाला स्थित है। इसके अतिरिक्त यहां पर एक सभाघर और एक हेलीपैड भी स्थित है। जैन धर्म से जुड़ा यह मंदिर जैन धर्म के दिगंबर समुदायों से संबंध रखता है।

यह इमारत तीन मंजिल का है और हर एक मंजिल में 24 अलग-अलग जैन धर्म के मंदिर है। इस तरह इस पूरे कैलाश पर्वत पर जैन धर्म से संबंधित कुल 72 अलग-अलग मंदिर है।

कर्ण मंदिर

कर्ण मंदिर हस्तिनापुर में स्थित महाभारत काल का एक और प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। कहा जाता है इस मंदिर का निर्माण महारानी कुंती के जेष्ठ पुत्र कर्ण के द्वारा किया गया था।

Karan Temple Hastinapur
कर्ण मंदिर

यहां पर उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की थी और इस मंदिर का निर्माण उन्होंने अंग प्रदेश के राजा बनने से पहले किया था। कहा जाता है कि वह हर दिन इस मंदिर में आते थे और भगवान शिव की पूजा अर्चना करते थे।

उसके बाद अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार जो भी मनुष्य उनके सामने आता उसे उसकी इच्छा के अनुसार दान प्रदान करते थे। मंदिर की सरंचना और वास्तुकला बेहद खूबसूरत है। इसीलिए हस्तिनापुर आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक आकर्षक स्थान है।

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हस्तिनापुर में क्या क्या करें?

अगर आप हस्तिनापुर घूमने जाते हैं तो हस्तिनापुर में करने के लिए बहुत सारी चीजें हैं। यहां पर स्थित खूबसूरत पर्यटन स्थलों को देखने के साथ ही यहां पर आप एरावत हाथी की सवारी कर सकते हैं।

जंबूद्वीप के पास एरावत हाथी की सवारी हस्तिनापुर में एक मजेदार और रोमांचक गतिविधि है। मात्र ₹20 के टिकट लेकर आप एरावत हाथी की सवारी कर सकते हैं, जो आपको जंबूद्वीप परिसर की पूरी परिक्रमा कराएगा, जिसके द्वारा आप यहां के आसपास के खूबसूरत चीजों को देख पाएंगे।

इतना ही नहीं यहां पर आप गंगा नदी में नांव सवारी का भी आनंद ले सकते हैं। यहां पर यह भी मान्यता है कि गंगा नदी में सिक्के डालने से इच्छा पूरी हो जाती है।

हस्तिनापुर का स्थानीय भोजन

हस्तिनापुर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है और उत्तर प्रदेश के लोग स्वादिष्ट और लजीज खाने के शौकीन होते हैं। यही कारण है कि यहां पर आपको स्वादिष्ट व्यंजनों की कोई कमी नहीं होगी।

यहां पर एक से बढ़कर एक रेस्टोरेंट्स और होटल है, जहां पर आप लजीज भोजन का लुफ्त उठा सकते हैं। खासकर के यहां के स्ट्रिट फूड में चार्ट काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। इसीलिए हस्तिनापुर की यात्रा के दौरान यहां के चाट का स्वाद जरूर लें।

इसके अतिरिक्त अगर यहां पर आप मुफ्त में स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेना चाहते हैं तो यहां के भाई धर्म सिंह गुरुद्वारा का दर्शन करने जा सकते हैं, जो हस्तिनापुर से ढाई किलो मीटर की दूरी पर शेफपुर नामक गांव में स्थित है।

यहां पर हर गुरुवार को बहुत बड़ा लंगर आयोजित होता है। इस लंगर में स्वादिष्ट प्रसाद बनाए जाते हैं, जो सभी धर्मों के श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं।

हस्तिनापुर घूमने जाने का समय

वैसे तो पर्यटन की दृष्टि से हस्तिनापुर एक ऐतिहासिक शहर होने के कारण यहां पर हर मौसम में पर्यटकों का आना-जाना बना रहता है। लेकिन जनवरी से मार्च के दौरान यहां पर कड़ाके की ठंड रहती है।

सर्दियों में यहां का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री तक चला जाता है। वहीं मई से जून के दौरान यहां का औसतन तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक होता है। ऐसी भारी गर्मी में यहां की यात्रा करने में थोड़ी परेशानी होती है।

इसके अलावा जुलाई से अगस्त में यहां पर जोरदार बारिश होती है। इसीलिए अगर आप हस्तिनापुर के सभी पर्यटन स्थलों को अच्छे तरीके से घूमना चाहते हैं तो सितंबर से दिसंबर तक का समय पर्यटकों के लिए हस्तिनापुर घूमने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

इस दौरान यहां का मौसम बहुत ही सुहाना और हल्की हल्की धूप होती है, जो आपकी यात्रा को और भी ज्यादा सुखद बना देता है।

हस्तिनापुर में रूकने की जगह

हस्तिनापुर मेरठ का एक खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थान है। अगर यहां पर आप अच्छी सुविधाओं के साथ होटल चाहते हैं तो हस्तिनापुर से 35 किलोमीटर दूर मेरठ में ठहर सकते हैं, जहां पर आपको एक से बढ़कर एक और अच्छी सुविधाओं के साथ आपके बजट के अनुसार होटल्स मिल जाएंगे।

हस्तिनापुर कैसे पहुँचें?

अगर आप बस या निजी वाहन के जरिए सड़क मार्ग से हस्तिनापुर आना चाहते हैं तो बता दें कि हस्तिनापुर राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग से अच्छे तरीके से जुड़ा हुआ है।

दिल्ली से हस्तिनापुर 132 किलोमीटर, मुंबई से 1500 किलोमीटर, कोलकाता से 1500 किलोमीटर और बंगलुरु से 2200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

अगर आपका बजट अच्छा है और आप कम समय में हस्तिनापुर पहुंचना चाहते हैं तो आप हवाई मार्ग का चयन कर सकते हैं।

हवाई मार्ग के जरिए हस्तिनापुर जाने के लिए यहां का सबसे निकटतम हवाई अड्डा दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। दिल्ली से हस्तिनापुर की दूरी तकरीबन 145 किलोमीटर है। दिल्ली से हस्तिनापुर के लिए आपको कई बस या टैक्सी मिल जाएगी।

दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण आपको कहीं से भी आसानी से यहां के लिए फ्लाइट मिल जाएगी।

अगर आप सस्ते में हस्तिनापुर पहुंचना चाहते हैं तो आप रेलमार्ग का चयन कर सकते हैं, जो हस्तिनापुर पहुंचने के लिए एक सुलभ माध्यम है। रेल मार्ग के जरिए हस्तिनापुर पहुंचने के लिए यहां का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन मेरठ शहर का रेलवे स्टेशन, हापुड रेलवे स्टेशन और मुजफ्फरनगर का रेलवे स्टेशन है।

मेरठ रेलवे स्टेशन से हस्तिनापुर की दूरी 35 किलोमीटर है। वहीं मुजफ्फरनगर और हापुड रेलवे स्टेशन से यहां की दूरी क्रमशः 45 किलोमीटर और 50 किलोमीटर की है।

FAQ

हस्तिनापुर किस लिए प्रसिद्ध है?

हस्तिनापुर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह हिंदुओं एवं जैन धर्म के दोनों समुदायों के लिए एक समान रूप से एक पवित्र स्थान है। यह जैन धर्म के 3 तीर्थकरो का जन्म स्थान भी है। यहां पर हिंदू और जैन धर्म से संबंधित कई सारी प्राचीन मंदिर स्थित है।

हस्तिनापुर में क्या-क्या घूमने लायक है?

हस्तिनापुर महाभारत के समय पांडवों और कौरवों की राजधानी हुआ करती थी। महाभारत के इतिहास को दर्शाता यहां पर कई सारे मंदिर और खूबसूरत पर्यटन स्थल है, जिसमें कर्ण मंदिर, द्रोणेश्वर मंदिर, पांडेश्वर मंदिर, द्रोपदी घाट, कामघाट स्थित है।

हस्तिनापुर का पुराना नाम क्या है?

हस्तिनापुर जो उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में स्थित है। यह महाभारत काल में कौरवों की राजधानी हुआ करती थी और उस समय इसे धर्म नगरी के नाम से जाना जाता था।

हस्तिनापुर में कौन सी नदी स्थित है?

हस्तिनापुर मेरठ के पास स्थित है, जो गंगा नदी के किनारे पर बसा है।

हस्तिनापुर में कौन-कौन से त्योहार और मेले आयोजित होते हैं?

हस्तिनापुर में कई सारे सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिसमें कार्तिक मेला, दुर्गा पूजा, दास लक्षणा और अक्षय तृतीया प्रमुख है।

हस्तिनापुर से कुरुक्षेत्र की दूरी कितनी है?

हस्तिनापुर से कुरुक्षेत्र की दूरी 171.8 km है।

निष्कर्ष

उपरोक्त लेख में आपने उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित एक ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर (Places To Visit In Hastinapur) के बारे में जाना। हस्तिनापुर जिसका नाम महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, जो पांडवों की राजधानी हुआ करती थी।

आज के इस लेख में हस्तिनापुर की यात्रा (hastinapur me ghumne ki jagah) से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी आपने प्राप्त की। हमें उम्मीद है कि यह लेख आपके हस्तिनापुर की यात्रा को आसान बनाने में मदद करेगा।

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